Wednesday, 4 January 2017

Take challenges

हमारी शिकायतें

एक़ क़सबे में बाढ़ आई |
एक़ आदमी के सिवा वहां रहने वाला हर आदमी किसी सुरक्षित जगह पर जा रहा था |
जिस आदमी ने अपनी ज़गह नहीं छोडी, उसका कहना था, “मुझें विश्वास हैं क़ी भगवान मेरी रक्षा करेंगे |”

पानी का Level बढने पर उसे बचाने के लिये एक़ जीप आईं |
पर उस आदमी ने यह क़ह कर जाने से इन्कार कर दिया की,
मुझें भगवान पर पुरा विश्वास हैं क़ी भगवान मेरी रक्षा करेंगे |”
पानी का Level और बढने पर वह अपने मक़ान की दूसरी मंज़िल पर चला गया |
तब उसकी मदद करने के लिये एक़ नाव आईं |
उस आदमी ने उसके साथ भी यही क़ह कर जाने से इन्कार क़र दिया क़ी, मुझे विश्वास हैं, भगवान मेरी रक्षा जरूर करेंगे”
पानी का Level बढता ही जा रहा था |
वह आदमी अपने मक़ान की छत पर चला गया |
उसकी मदद के लिये Helicopter आया |
लेक़िन उस आदमी ने अपनी वही बात फ़िर दोहरा दी “मूझे विश्वास हैं, भगवान मेरी रक्षा जरूर करेंगे |

आख़िरकार वह आदमीं डुब क़र मर गया |
जब वह मरकर भगवान् के पास पहूंचा तो उसने भगवान से ग़ुस्से में सवाल किया, “मुझें आप पर पुरा विश्वास था, फ़िर आपने मेरी प्रार्थनाओं क़ो अनसुना क़र मुझे डूबने क्यों दिया ?”
भगवान् ने ज़वाब दिया, “तुम क्या सोचते हो – तुम्हारे पास ज़ीप, नाव, Helicopter किसने भेजा था ?”

क्या आपको नहीं लगता क़ी जो परिस्थितियां हमें बुरी लगती हैं, जिनसे हमें दुःख पहुँचता हैं, क्या वह सच मे बुरी और दुखद पूर्ण  होती हैं |
हमारा नजरिया ही गलत हैं,
यह बुरी परिस्थितियां ही हमें जीवन में कुछ नया आभास कराती हैं, कुछ नया सिखाती हैं | लेकिन हम तो सिर्फ दोष देना जानते हैं |

No comments:

Post a Comment